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Ramprakash Tripathi


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पंच मकार

Posted On: 27 Feb, 2010  
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माया का सच

Posted On: 2 Aug, 2011  
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माया का सच

Posted On: 2 Aug, 2011  
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लोकपाल से ज्यादा जरूरी लोक में भरोसा

Posted On: 29 Jun, 2011  
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सहमे हुए दिन

Posted On: 25 Jun, 2011  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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गंगा को रहने दो गंगा

Posted On: 2 Jun, 2011  
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बेगानी शादी में दीवाने अब्दुल्ला

Posted On: 30 Apr, 2011  
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मेरा भारत महान

Posted On: 6 Feb, 2011  
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असीमानंद का सच

Posted On: 3 Feb, 2011  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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वंशवाद

Posted On: 7 Aug, 2010  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

त्रिपाठी जी सिर्फ चरित्र की गरीबी के कारण ही आज हम कंगाली में जी रहे हैं, अन्यथा आज भी हम सबसे ज्यादा दौलतमंद हैं लेकिन अगर आप आज समाज को देखें तो समाज निरंतर नैतिक पतन की तरफ जा रहा है. आज समाज की एक सबसे छोटी इकाई अर्थात आम आदमी भ्रष्ट हो गया है. अदने से पैसे को भगवान मान लिया गया है. घर घर में पैसे को लेकर कोहराम मचा हुआ है, मनुष्य आज "येन केन प्रकारेण" धन कमाना चाहता है अपनी मेहनत से नही आता है तो दूसरे से छीन कर या हड़प कर. शील मर्यादा सब तार तार है इस पैसे के आगे. शेष विश्व से भारत की तुलना नही कीजियेगा. भारत नैतिक मूल्य, मर्यादा, चरित्र में कसौटी की तरह है शेष विश्व के लिए. लेकिन आज आपनी कसौटी पर ही दाग लग गया है. अगर हम अपनी चरित्रगत विशेषताओं में रहें तो हम बहुत धनी हो जायेंगे. इति शुभम...

के द्वारा:

मनु जी, पत्रकार होने के नाते बहुत सी जानकारियां होती हैं, जो संज्ञान में होते हुए भी इसलिए नहीं लिखी जा सकतीं, क्योंकि उनके लिए साक्ष्य भी देने की जिम्मेदारी हमारी ही होती है। कांग्रेस का पूरा शासनकाल देखें। आंकलन करें। राजग सरकार में आपको या किसी को गैस के लिए लाइन में लगना पड़ा था क्या। पहले यही सिम कार्ड सोने की तरह मिलते थे, राजग सरकार में आसानी से मिलने लगे। भ्रष्टाचार का धन कहां जा रहा है। एक नये पैसे की बरामदगी नहीं हुई है। ईसाईकरण का सच देखना हो तो झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, नगालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश में देखें, मैंने देखा है। कोड़ा की सरकार क्यों गिरी झारखंड में, एक मामले में उन्होंने स्टैंड सेवा भारती के पक्ष में लिया था, मिशनरियों ने वहां से उखाड़ना चाहती थीं। उसी दिन से उनकी उल्टी गिनती शुरू हो गई। सच तो बहुत कुछ है। सच और भी है। इस देश की जनता तो विदेशी महिला के शासन से मुक्ति चाहिए। डमी प्रधानमंत्री हैं, जो आम चुनाव लड़ने की ताकत नहीं जुटा सके। यह कौन सा झूठ है। समझौता एक्सप्रेस मामले में रिपोर्ट संघ परिवार या नागपुर से नहीं लिखी गई थी। सरकारी खुफिया एजेंसियों ने दी थी। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद झूठ नहीं है। माले गांव और मक्का मस्जिद विस्फोट का सच भी सामने ही आयेगा। बोफोर्स में दलाली किसने खायी। यह सब बोलना पक्षपात है क्या।

के द्वारा: ramprakash ramprakash

प्रीतम जी, यह पक्षपात पूर्ण लेखन नहीं है यह। सच पचाने की ताकत लायें, कांग्रेस का शासन कहां अच्छा चल रहा है। पत्रकार होने के नाते बहुत सी जानकारियां होती हैं, जो संज्ञान में होते हुए भी इसलिए नहीं लिखी जा सकतीं, क्योंकि उनके लिए साक्ष्य भी देने की जिम्मेदारी हमारी ही होती है। कांग्रेस का पूरा शासनकाल देखें। आंकलन करें। राजग सरकार में आपको या किसी को गैस के लिए लाइन में लगना पड़ा था क्या। पहले यही सिम कार्ड सोने की तरह मिलते थे, राजग सरकार में आसानी से मिलने लगे। भ्रष्टाचार का धन कहां जा रहा है। एक नये पैसे की बरामदगी नहीं हुई है। ईसाईकरण का सच देखना हो तो झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, नगालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश में देखें, मैंने देखा है। कोड़ा की सरकार क्यों गिरी झारखंड में, एक मामले में उन्होंने स्टैंड सेवा भारती के पक्ष में लिया था, मिशनरियों ने वहां से उखाड़ना चाहती थीं। उसी दिन से उनकी उल्टी गिनती शुरू हो गई। सच तो बहुत कुछ है। सच और भी है। इस देश की जनता तो विदेशी महिला के शासन से मुक्ति चाहिए। डमी प्रधानमंत्री हैं, जो आम चुनाव लड़ने की ताकत नहीं जुटा सके। यह कौन सा झूठ है। समझौता एक्सप्रेस मामले में रिपोर्ट संघ परिवार या नागपुर से नहीं लिखी गई थी। सरकारी खुफिया एजेंसियों ने दी थी। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद झूठ नहीं है। माले गांव और मक्का मस्जिद विस्फोट का सच भी सामने ही आयेगा। बोफोर्स में दलाली किसने खायी। यह सब बोलना पक्षपात है क्या।

के द्वारा: ramprakash ramprakash

कांग्रेस का इतिहास जनता के साथ चल कपट,धोखे और विश्वासघात का रहा है अज देश की जो भी दुर्दशा या पिचादापन है,वह सिर्फ कांग्रस सरकारों की दें है.१९६९ में कांग्रेस के विभाजन के बाद जो इंदिरा कांग्रेस सत्ता में ई वह इस देश की पहकी असम्वाधानिक सर्कार थी और उसी समय से कांग्रेस की महँ न परम्परावो को अंगूठा दिखा दिया और एक गिरोह की शक्ल में तब्दील केर दिया और सरे नेताओ को अपनी नेता इंदिरा गांघी के दरवाजे के चुओखत पैर नक् रगदने को वध्य केर दिया चंद्रशेखर और,रामधन,कृष्णकांत जैसे लोगो को हसी पैर डालने की कोशिसे हुई और ऐसे खामोश न होने पैर साडी लोकतान्त्रिक परम्पराव,सम्वाधानिक व्यवस्थाओ को परे करते हुए जेल की सीखचों के पीछे दल दिया गया अज का कांग्रेसी विशुधा दलाल्संस्कृत में पला बगर रीढ़ का आदमी रह गया है जो एल ऐसी विदेशी महिला और अर्ध विदेशी युवराज के इशारो पैर मदारी के बंदर की तरह राजनीतिक मंच पैर विदूषक की तरह प्रहसन प्रस्तुत केर रहा दिख रखा है जिसे देख केर हास्य नहीं घ्रिदा का संचार होता है.जब प्रद्व मुखर्जी और अर्जुन सिंह जैसे वरिष्ठो के युवराज को देश का सर्वाधिक यज्ञ बताने और गाँधी नेहरु खंडन द्वारा प्रेस नोट जरी केर चेतावनी दी जाती है की युव्रास्ज को चापलूसी पसंद नहीं इस पैर रोक लगनी चाहिए तो ऐसा लगता है की इन्हें चुल्लू भर पानी भी नसीब नहीं जिसमे दुब्मारे.और अब तो मीडिया भी rahulgandhi के मह्मे अपनी साडी नातिकता को परे केर यही समझाने में लगा है की राहुल बाबा अब बड़े हो गए है इनकी उम्र खिलुओनो से खेलने की नहीं अब इन्हें देश से खेलना चाहिए.

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मेरा मानना है की इन सब की जड़ हमारी वयवस्था में फैला भार्स्ताचार है आप सोचिये आज हालत ये है की आम आदमी की सोच ये हो चुकी है की वो मानते है की बिना रिश्वत के कोई काम होगा ही नहीं और ये सारी सुरुआत होती है हमारे नेताओ से/ और नयायालय हमारा कुछ कर नहीं सकता क्योंकि उसको इन भ्रस्त नेताओ ने अपांग बना दिया है/ आज हमारी न्याय वयवस्था में बहुत बड़े बदलाव की जरुरत है लेकिन ये लोग उसको बदलने ही नहीं देंगे कयोंकि अगर कानून सख्त हो गए तो इनके कमाने के सारे धंधे ही बंद हो जायेंगे/ मवोवादियो के खिलाफ भी ये ही कोई करवाई नहीं करने देते कयोंकि अगर मावोवादी नहीं होंगे तो इनकी सरकारे कसे बचेंगी इनके विधायक कसे जीतेंगे/ अब आप खुद ही सोचिये की जैसे अगर कोई व्यक्ति रिश्वत देकर कोई नोकरी या पोस्ट पा लेता है तो वो भी रिश्वत जरुर लेगा ऐसे ही जो नेता मवोवादियों की मदद से जीते तो वो भी मावोवादी ही होगा.

के द्वारा:

नवनीत जी आप की आशंका उचित है। मेरा अनुमान है कि आप को श्री मुरलीधर राव के बारे में संभवतः ज्यादा जानकारी नहीं है। बीते दिनों उनके नेतृत्व में स्वदेशी जागरण मंच ने कई बड़ी लड़ाई लड़ीं हैं और जीती हैं, जो बहुराष्ट्रीय निगमों के वित्तीय दबाव के चलते मीडिया में नहीं नजर आयीं और न ही आयेंगी। दूसरे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के बारे में यह तो स्पष्ट होता है कि उसका अपना एक जनाधार होता है। बिना आधार के वह काम ही नहीं कर सकता बंधु। उसकी समाज में पकड़ होती है। प्रचारक जीवन की कार्यशैली की चर्चा और संघ की कार्यपद्धति के बारे में जानकारी देने के लिए अलग से लिख रहा हूं। यह लेख केवल टीम गडकरी पर था, न कि आरएसएस और मुरलीधर राव पर। वैसे लेख में यह संकेत ही काफी हीं है क्या कि अटल जी भी संघ के प्रचारक हैं और उन्होंने भी जहां मुरलीधर राव की तरह विविध क्षेत्र में काम किया था, वही तरुण विजय की तरह पत्रकारिता भी की थी। सामाजिक जीवन में जनाधार कैसे बनता है, और कैसे बनाया जाता है, यह एक विषद विषय है। पत्रकारिता के पहले मैंने एक लंबा समय इन संगठनों की तरह की संस्थाओं में गुजारा है। बहुत कुछ अनुभव जन्य अभी लिखना शेष है। जागरण के इस मंच पर अभी बहुत कुछ सामने आयेगा। पढ़ते रहिये भीषण भाषण। वैसे कांग्रेस की विरासत को छोड़ दें तो सोनिया गांधी और राहुल का क्या जनाधार है? लेकिन यह वक्त का तकाजा है कि कांग्रेस के बड़े-बड़े जनाधार वाले नेता उनके सामने बेकार साबित हुए?

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